Tuesday, 6 October 2020

"शायर का हाल" ( SHAYAR KA HAAL)



एक सोच, एक सवाल,
कुछ रंजिशें कुछ मलाल,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

एक तस्वीर अधूरी सी,
कुछ ख़्वाब, कुछ ख़्याल,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

कुछ लिखा कुछ छोड़ दिया,
कुछ अपना कुछ दिल का हाल,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

कुछ घिरा, कुछ छँट गया,
काली रात तन्हाई का जाल,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

लबों की हँसी, आँखो की नमी,
एक ज़िंदगी वो भी बेहाल,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

कुछ छूट गए कुछ रह गए,
बंद कमरे खाली मकान,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

तूने भी क्या पाया "चौहान",
दिल-ए-ज़मी को बना श्मशान,
यही है क्यूँ हर शायर का हाल।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
 

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