Saturday, 3 October 2020

"आये जो तू" (AAYE JO TU)


कभी आये जो तू तो बताऊँ,
हाल मेरा क्या है,
जिसका बस एक जवाब है तू,
वो सवाल क्या है,
आलम कुछ ऐसा है आजकल,
एक बस्ती विरान सी नज़र आती है,
उसमे एक घर मशान सा है,
चहरे पर नक़ाब है हँसी का खुशी का,
जो पूरा हो नही सकता अब चाहकर भी,
वो अरमान क्या है,
कुछ लिखा है कुछ अभी बाकी है,
अब जो मिल गया वही काफी है,
जो अब तलक नही लिख पाया,
"चौहान" वो जज़्बात क्या है
कभी आये जो तू तो बताऊँ...

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
 

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