तू जवाबों में जी,
जो ख़्याल हकीकत बना,
उन ख्यालों में जी,
ख़्वाईश भी क्या कुछ नही थी,
बस एक तेरी चाहत के सिवा,
मैं मर गया हूँ चल,
अब तू तेरी चाहतों में जी,
तू मेरी मैं तेरी आदत थे कभी,
तूने आदत ही बदल ली "चौहान",
चल अब तू तेरी आदतों में जी।।
मजबूरियाँ थी या मजबूरियाँ हो गयी,
दूरियाँ थी नही जो दूरियाँ हो गयी,
मैं तेरे बिन तू मेरे बिन,
चल खुश रह ,अब दुरियों में जी।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Oohho heart touching lines👌👌👌👌👌👌🥃🥃🥃🥃🥃🥃
ReplyDeleteThanks 😍😍😍
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