Thursday, 17 September 2020

"इंतज़ार"(INTZAAR)



इंतज़ार मुझे भी रहेगा उस वक़्त का, उस लम्हात का,

तुझे झगड़ा ही सही पर एक मुलाक़ात का, 

अभी वक़्त और हालातों से मज़बूर हूँ,

रूह से नही ज़िस्म से ही दूर हूँ,

आज भी तेरे हालातों में खुद को जीता हूँ,

आज भी इंतज़ार में हूँ घूँट सब्र के पीता हूँ,

नाराज़गी गिले शिकवे सब दूर कर लेना फिर,

कहीं ना जा सकूँ इतना मज़बूर कर लेना फिर,

आज भी तेरी हँसी के लिए सबकुछ करने को तैयार हूँ,

तेरी खुशियों के लिए मरने को तैयार हूं ,

मत लाया कर यूँ आँखो में आँसू,

अब सहा नही जाएगा,

पास आकर जी भर के रो लेना,

इन मोतियों को थामने हाथ मेरा ही आएगा,

तू कहे या ना कहे मैं सब जानता हूँ,

एक रात तूने मजबूरियां बताई थी "चौहान" को,

मैं अब तलक अपनी कही बात मानता हूँ,

ये इश्क़ मेरी साँसों में रवा है,

मैं युहीं ना मिटने दूँगा,

फिर कभी आऊँगा तेरा होकर,

तेरी बात सुनने, तेरा हमसफ़र बनकर,

फिर वो वक़्त युहीं न गुज़रने दूँगा।।

मेरी हर साँस मुहोब्बत है तेरी,

मैं खुद को युहीं न मरने दूँगा।।


शुभम् सिंह चौहान

मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
 

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