सवाल नज़र का नज़रो से ही बताने दो,
इशारों को इशारे रहने दो ज़ुबाँ तक ना आने दो।।
कुछ बातें है जो तेरे मेरे दरमियां रहने दे,
पहलियों को पहलियों में ही सुलझाने दो ।।
अब क्या बताऊँ की क्या राज़ है जिंदगी मेरी,
राज़ को अब बस एक राज़ ही रह जाने दो ।।
ना जाने क्या क्या ज़ुबाँ बोलता है ज़माना,
अपने राह पर रहो जमाने को बोलते जाने दो।।
क्या हुआ गर लहरे टकराकर मुड़ रही है किनारो से,
सुनामी बनकर भी आयेंगी एक रोज़ वक़्त तो आने दो।।
वो जो इश्क़ किताबों में अधूरा रह गया "चौहान",
अब गड़े मुर्दे ना उखाड़ उन्हें दफन रह जाने दो।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
इशारों को इशारे रहने दो ज़ुबाँ तक ना आने दो।।
कुछ बातें है जो तेरे मेरे दरमियां रहने दे,
पहलियों को पहलियों में ही सुलझाने दो ।।
अब क्या बताऊँ की क्या राज़ है जिंदगी मेरी,
राज़ को अब बस एक राज़ ही रह जाने दो ।।
ना जाने क्या क्या ज़ुबाँ बोलता है ज़माना,
अपने राह पर रहो जमाने को बोलते जाने दो।।
क्या हुआ गर लहरे टकराकर मुड़ रही है किनारो से,
सुनामी बनकर भी आयेंगी एक रोज़ वक़्त तो आने दो।।
वो जो इश्क़ किताबों में अधूरा रह गया "चौहान",
अब गड़े मुर्दे ना उखाड़ उन्हें दफन रह जाने दो।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

कुछ बातें है जो तेरे मेरे दरमियां रहने दे,
ReplyDeleteपहलियों को पहलियों में ही सुलझाने दो ।🌹🌹🙏🙏♥️♥️♥️♥️🙏🙏🌹🌹🌹🙏♥️♥️
Thanks bro😍😍😍
Delete