अब थक गया हूँ तुझे ढूंढते-ढूंढते,
कभी किसी राह में मिल जा अनजाने से।।
फिर शिकायतें भी कर लेना जी भर के,
एक बार फिर सीने से लगा किसी बहाने से।।
कहाँ सजदे करूँ कहाँ मन्नतें माँगू तेरे लिए,
क्या अब नही आएगा तू मेरे बुलाने से।।
ये आँखों के आँसू क्यूँ नज़र ना आते तुझे,
फिर रिश्ते टूट जाते है क्या मर जाने से।।
तूने ही तो कहाँ था अच्छा लगता है तुझे,
मुझसे यूँ बार बार मिलने आने से।।
अब मैं भी तुझसा हो जाऊँ क्या "चौहान",
क्या पा लिया मैंने भी लिखने लिखाने से।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

♥️♥️😘😘
ReplyDeleteThanks bro 😍😍
DeleteBhout hi pyara ����
ReplyDeleteThanks 😍😍
Delete✍️✍️✍️✍️✍️👌👌👌👌👌👌👌👌😍
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