अलिफ़ लैला की कहानी ,
जैसे मैं जहाज़ी सिंदबाद ।।
कई राज समेटे खुद में जैसे,
कोई तिलस्मी क़िताब ।।
ये मेरे ख़्वाबों का शहर,
जैसे सल्तनत बगदाद।।
मेरे हाथों की लकीर जैसे,
हो अलादीन का चिराग।।
कुछ ख्वाईशें ऐसी रही जैसे,
नूरानी चहरे पर हिज़ाब।।
शायरों की बस्ती में "चौहान",
जैसे किसी रुख़ पर नक़ाब।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
जैसे मैं जहाज़ी सिंदबाद ।।
कई राज समेटे खुद में जैसे,
कोई तिलस्मी क़िताब ।।
ये मेरे ख़्वाबों का शहर,
जैसे सल्तनत बगदाद।।
मेरे हाथों की लकीर जैसे,
हो अलादीन का चिराग।।
कुछ ख्वाईशें ऐसी रही जैसे,
नूरानी चहरे पर हिज़ाब।।
शायरों की बस्ती में "चौहान",
जैसे किसी रुख़ पर नक़ाब।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No comments:
Post a Comment