Monday, 13 July 2020

"रोक लेते" ( ROK LETE)


सुनते कभी तेरी शिकायतों को,
दूर करते सभी शिकवे गिले,
ना होती ये दूरियाँ , ना ग़मो के काफिले,
जाते जाते मुड़ के देख लेते,
रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।

आँखो में नमी थी पर तुम देख ना पाए,
रोते रहे रात भर अश्क़ थम ना पाए,
देखना गवारा नही था तो ना सही,
एक बार चलते कदम ही रोक लेते,
रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।

ये रास्ते मुझे आज भी तुम तक ले जाते है,
ये होंठ तेरे ही गीत गुनगुनाते है,
चाहे कुछ भी हमारी खताओं की सज़ा दी लेते,
रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।

हम आज भी उन्हीं राहों पर घूमते है,
ख्यालों-मसक्कत में तुझे ही ढूंढते है,
"चौहान" को सपनो में ही आकर कह देते,
रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


4 comments:

  1. न हमने कुछ कहा न तुम दिल मेरे कि जान पाए ,
    न हम कुछ बोले न तुम हमें रोक पाए।

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  2. Nice lines sir 👌👌👌

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