सुनते कभी तेरी शिकायतों को,दूर करते सभी शिकवे गिले,ना होती ये दूरियाँ , ना ग़मो के काफिले,जाते जाते मुड़ के देख लेते,रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।आँखो में नमी थी पर तुम देख ना पाए,रोते रहे रात भर अश्क़ थम ना पाए,देखना गवारा नही था तो ना सही,एक बार चलते कदम ही रोक लेते,रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।ये रास्ते मुझे आज भी तुम तक ले जाते है,ये होंठ तेरे ही गीत गुनगुनाते है,चाहे कुछ भी हमारी खताओं की सज़ा दी लेते,रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।हम आज भी उन्हीं राहों पर घूमते है,ख्यालों-मसक्कत में तुझे ही ढूंढते है,"चौहान" को सपनो में ही आकर कह देते,रोक लेते वही एक बार कहकर तो देखते।।शुभम् सिंह चौहानमेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
पहचान खुद-ब-खुद हो जायेगी तेरी मुझसे, कभी मेरे नज़रिए से मुझे पढ़ के तो देख!!
Monday, 13 July 2020
"रोक लेते" ( ROK LETE)
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"गुनाह"(GUNAAH)
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Fabulous bhai
ReplyDeleteThanks bro 😊😊
Deleteन हमने कुछ कहा न तुम दिल मेरे कि जान पाए ,
ReplyDeleteन हम कुछ बोले न तुम हमें रोक पाए।
Nice lines sir 👌👌👌
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