Tuesday, 7 July 2020

"राज़ कोई" (RAAZ KOI)


ना जाने "चौहान"दुनिया क्या क्या पढ़ लेती है,
तेरी कलम से ज़्यादा राज़ तेरी आँखें लिए बैठी है।।

ये कोई उम्र का तज़ुर्बा तो नही है फिर क्यूँ हर बार,
तेरी कलम लोगो की दिल की बात कह देती है।।

क्या ऐसी ख़लिश है तुझमे जो अब तलक भरी नही,
हर वक़्त तेरी आँखे है कि किसी की तलाश में रहती है।।

सुख गया वो दरख़्त पर कमज़ोर नही पड़ा अब तलक, 
टहनी है पतझड़ में भी हरे होने की उम्मीद में रहती है।।

रोज़ सोचता हूँ के अब बंद कर दूंगा लिखना मुहोब्बत "चौहान"
ये कलम है के मेरी हर वक़्त इश्क़ के नशे में चूर रहती है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

3 comments:

  1. ♥️♥️♥️♥️♥️👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌

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  2. Wow amazing 😊👌👌👌👌♥️👌👌👌👌

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