Friday, 31 July 2020

"एक शायर" (EK SHAYAR)


कोई पूछे तो तुम मेरा नाम बताना,
मुहोब्बत लिखना मेरा काम बताना।।

जिसमें तुमपर ना कोई दाग लगे,
ऐसे ही कुछ मेरे इल्ज़ाम बताना।।

कहानी अगर पूछे कोई इश्क़ की अपनी,
मुझे ज़मी खुद को आसमान बताना।।

वो जो उठने से पहले ही दब गए,
वो ज़िंदा दफन अरमान बताना।।

पूछेंगे सब की कैसा है ये इश्क़ का शहर,
सबको कहना भूले से भी यहाँ मत आना।।

कही सपने, अरमान, ख्वाइशें दफन है यहाँ,
इस शहर को तुम शमशान मत बताना।।

जितनी ग़ज़ल लिखी "चौहान" ने "जान" के लिए,
उनकी तस्वीर बना फिर दीवारों पर मत सजाना।।

एक नज़्म लिख तो जाऊँगा तेरी ख़ातिर मगर,
जवाबों की तलाश में मेरी कब्र तक मत आना।।

कोई पूछे कि हर वक़्त ये उदासी, तन्हाई क्यूँ है,
"एक शायर को दिल दिया था" कहकर मुकर जाना।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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