वो मेरी माँ तो नही पर बिल्कुल माँ जैसा है,
हक़ीक़त है मेरा बाप उस खुदा के जैसा है।।
जज़्बात उसके दिल मे भी है माँ जैसे ही,
पर सच, कभी आँखों से बहने ना देता है।।
फ़िक्र उसे भी उतनी ही होती है मेरे घर आने की,
बेचैन रहता था मेरे इंतज़ार में,चौंखट पर बैठा ना है।।
गुस्सा करता है वो लाखों दफ़ा माँ के कहने पर,
पर कोई मुझे कुछ बोले ये भी सहता ना है।।
खून पसीने सा बहाया है दिन रात मेहनत कर उसने,
जो कुछ भी मैंने माँगा वो मुझे लाकर भी देता है।।
ना जाने कितनी ही जगह से रफ़ू है वो पहरान उसके,
मेरे कपड़े फटने पर वो हमेशा नए ही दिलाता है।।
ऐसा नही है के उसकी ख्वाईशें उसके सपने नही थे,
अलग ही किरदार है मेरे सपनों की खतिर जीता है।।
क्या कुछ नही करता है एक मेरी ख़ुशी की ख़ातिर,
"चौहान" अपनी औकात अपनी हदों से गुज़र जाता है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
Gajab....������
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteLikha to bahoot khoob h...but tha krke kyu likha
ReplyDeleteThanks ...unke liye jiske father nhi h ab unke sath
DeleteNice and truth....I miss my papa after read this....🙏🙏🙏
ReplyDeleteThanks don't be sad m always with u mote 😍😍😍😥😥😘😥
DeleteSuperb lines👌👌
ReplyDeleteThanks bro 😘😘😘
DeleteTop class lines brother ❤️
ReplyDeleteThanks bro 😘😘😘😘
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