चलो अब तुम्हे भी हक़ीक़त से रूबरू करवाता हूँ,
खामोश था सदियों से आज अपनी कहानी बताता हूँ।।
ज़्यादा बड़ी तो नही बस कुछ पन्नों में सिमट कर रह गयी ,
ठीक वैसे की कोई गम की बेल खुशियों के पेड़ से लिपट कर रह गयी।।
थोड़े बचपन के किस्से है थोड़ी जवानी की कहानी है,
दोस्ती मुहोब्बत से बनी ये मेरे अहसास की कहानी है।।
पहले ज़िन्दगी मेरे इशारों पर थी अब मैं ज़िन्दगी के इशारों पर हूँ,
बरसों पहले डुब गया था इश्क़-ए-सागर में आज लाश बन किनारों पर हूँ।।
हाँ मुहोब्बत भी की है किसी से हद से बढ़कर मैंने,
पर अब तलक जो लिखी वो सब कहानी बेगानी है।।
वो मुझे मिले या फिर मिलकर बिछड़ जाए सब किस्मत है,
पर ये मेल हमारा जिस्मों का नही ये इश्क़ रूहानी है ।।
हाँ जहाँ सही हूँ वहाँ अपने बड़ो, गुणकारो से भी लड़ा हूँ,
जहाँ गलत हूँ वहाँ मैंने शरेआम अपनी गलती भी मानी है।।
चार दोस्त बनाये थे मैंने , सब के सब कोहिनूर थे ज़िंदगी के मेरी,
एक हीरा खो दिया मैंने, दो मशरूफ़ है ज़िन्दगी में अपनी,एक में बसती मेरी ज़िंदगानी है।।
एक से दूर होकर भी कभी मैं दूर हो ना पाया ,
एक ऐसा सो गया कि फिर मैं सो ना पाया।।
कुछ पन्ने थे जो छुपा कर रखे थे मैंने सबसे,
वक़्त ने साज़िश कर सारे अल्फ़ाज़ मिटा दिए।।
कुछ रिश्तों को आज भी संभाल कर रखता हूँ नई किताबों की तरह,
कुछ अहम है आज भी उन किताबों की तरह जिनकी जिल्द पुरानी है।।
कौन रोक पाया है आखिर किसी को हदों से गुजरने पर,
ये रास्ता अपना खुद बना लेगा ये बारिशों का पानी है।।
आज थोड़ा रुक कर सोच रहा हूँ की किन रास्तों पर हूँ,
ये मेरी मंज़िल तो नही फिर क्यों लगती जानी पहचानी है।।
ये जो कल इन किताबों में बंद होकर मर जाएगी ये मुहोब्बत रूहानी है,
ये मेरी कहानी है "चौहान" , एक दिन युहीं अनकहीं रह जानी है।।
ये सब जो भी आज कविताओं में लिखते आया हूँ बस एक सोच है मेरी,
थोड़ा सुकून मिलता है रूह को बस तब से "चौहान" ने कलम उठा ली है ।।
कुछ बातें आज भी छुपा के रख ली है वक़्त की नजाकत समझ कर,
कुछ का ज़िक्र नही हुआ क्योंकि वो बीते वक़्त की कहानी है।।
कुछ कमी है अभी शायद जो यूँ अधूरी अधूरी सी लगती है ,
ये मेरी कहानी है "चौहान" , एक दिन युहीं अनकहीं रह जानी है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
खामोश था सदियों से आज अपनी कहानी बताता हूँ।।
ज़्यादा बड़ी तो नही बस कुछ पन्नों में सिमट कर रह गयी ,
ठीक वैसे की कोई गम की बेल खुशियों के पेड़ से लिपट कर रह गयी।।
थोड़े बचपन के किस्से है थोड़ी जवानी की कहानी है,
दोस्ती मुहोब्बत से बनी ये मेरे अहसास की कहानी है।।
पहले ज़िन्दगी मेरे इशारों पर थी अब मैं ज़िन्दगी के इशारों पर हूँ,
बरसों पहले डुब गया था इश्क़-ए-सागर में आज लाश बन किनारों पर हूँ।।
हाँ मुहोब्बत भी की है किसी से हद से बढ़कर मैंने,
पर अब तलक जो लिखी वो सब कहानी बेगानी है।।
वो मुझे मिले या फिर मिलकर बिछड़ जाए सब किस्मत है,
पर ये मेल हमारा जिस्मों का नही ये इश्क़ रूहानी है ।।
हाँ जहाँ सही हूँ वहाँ अपने बड़ो, गुणकारो से भी लड़ा हूँ,
जहाँ गलत हूँ वहाँ मैंने शरेआम अपनी गलती भी मानी है।।
चार दोस्त बनाये थे मैंने , सब के सब कोहिनूर थे ज़िंदगी के मेरी,
एक हीरा खो दिया मैंने, दो मशरूफ़ है ज़िन्दगी में अपनी,एक में बसती मेरी ज़िंदगानी है।।
एक से दूर होकर भी कभी मैं दूर हो ना पाया ,
एक ऐसा सो गया कि फिर मैं सो ना पाया।।
कुछ पन्ने थे जो छुपा कर रखे थे मैंने सबसे,
वक़्त ने साज़िश कर सारे अल्फ़ाज़ मिटा दिए।।
कुछ रिश्तों को आज भी संभाल कर रखता हूँ नई किताबों की तरह,
कुछ अहम है आज भी उन किताबों की तरह जिनकी जिल्द पुरानी है।।
कौन रोक पाया है आखिर किसी को हदों से गुजरने पर,
ये रास्ता अपना खुद बना लेगा ये बारिशों का पानी है।।
आज थोड़ा रुक कर सोच रहा हूँ की किन रास्तों पर हूँ,
ये मेरी मंज़िल तो नही फिर क्यों लगती जानी पहचानी है।।
ये जो कल इन किताबों में बंद होकर मर जाएगी ये मुहोब्बत रूहानी है,
ये मेरी कहानी है "चौहान" , एक दिन युहीं अनकहीं रह जानी है।।
ये सब जो भी आज कविताओं में लिखते आया हूँ बस एक सोच है मेरी,
थोड़ा सुकून मिलता है रूह को बस तब से "चौहान" ने कलम उठा ली है ।।
कुछ बातें आज भी छुपा के रख ली है वक़्त की नजाकत समझ कर,
कुछ का ज़िक्र नही हुआ क्योंकि वो बीते वक़्त की कहानी है।।
कुछ कमी है अभी शायद जो यूँ अधूरी अधूरी सी लगती है ,
ये मेरी कहानी है "चौहान" , एक दिन युहीं अनकहीं रह जानी है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Gajab ��
ReplyDeleteThanks 😍😍😍
DeleteVery Nice Shubham Sir����������������
ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍😍😍😘😘😘😘
DeleteNice👌👌❤️
ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍😍
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