क्या हाल है मेरे आजकल तुम्हे क्या मैं बताऊँ,
मुझे खुद समझ नही आता तुम्हे क्या समझाऊँ।।
अजीब सा डर है दिल मे की कुछ खो ना दूँ,
खुद लिख के कहानी अपनी खुद ही रो ना दूँ।।
अब खुद को भी मैं खुद से खोना नही चाहता हूँ,
जैसा हो गया हूं वैसा मैं होना नही चाहता हूँ।।
पहले सब कुछ ठीक था इन आँखों मे आँसू ना आते थे,
हर बुरे दौर से गुजरे पर अश्क़ ना कभी बहाते थे।।
अब बेगानों से नही अपनो से डर लगता है,
अब हकीकत से नही सपनो से डर लगता है।।
आज हर किसी के गम को अपना समझ लेता हूँ,
लिखने के बहाने "चौहान" अकेले में रो लेता हूँ।।
क्या पता कब तक यूँ हाल अपना लिख लिख कर बताऊँगा,
एक रोज़ आएगा इन कहानियों की तरह मैं भी किताबों में दफ़न हो जाऊँगा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Gajab....������ really heart touching ������
ReplyDeleteThanku so much 😍😍😍😍
DeleteAcha likha hai.....
ReplyDeleteHeart touching lines😔
ReplyDeleteThanks alot bro 😍😍😍
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