Tuesday, 18 June 2019

"मेरे बाद" "MERE BAAD)


मेरे बाद भी तुझे कभी कहीं झुकने नही दूँगा,
तू चाँद है इस आसमाँ का, तारों से टूटने नही दूँगा।।

माना शाम अच्छी है मुहोब्बत के रंग की मगर,
शाम के ख़ातिर तुझे सूरज की तरह डूबने नही दूँगा।।

किनारे तक आज आ ही गए हो तो यही ठहर जाना,
लहरों की तरह पत्थरों से टकरा वापिस मुड़ने नही दूँगा।।

इन आँसुओं को समझा कर रखना के आँखे दहलीज़ है,
हालात कैसे भी हो इस चौंखट से पार गुज़रने नही दूँगा।।

रास्ते अनजान सही पर आखिर मंज़िल इनकी भी है,
साये सा तेरे साथ रहूँगा सफर में अकेला पड़ने नहीं दूंगा।।

कलम जब भी उठेगी ज़िक्र तेरा हमेशा करेगा "चौहान",
मुहोब्बत इबादत है मेरी बंद किताबों में मरने नही दूँगा।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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