मैं कैसे कह दूँ उसको, के इश्क़ में हदो को पार करके आजा,
मैं भी किसी का भाई हूँ ,बेटा हूँ,
वो भी किसी की इज़्ज़त है ,अमानत है,
कैसे कह दूँ "चौहान" दिलों के रिश्ते के ख़ातिर, रिश्ते खून के तोड़ के आजा।।
मैं ऐसा उसका कौन हूँ ,मेरी बिसात ही क्या है,
कैसे कह दूँ के गुरुर अपनो का तोड़ के आजा।।
घर अपना देखता हूँ तो सहम जाता हूँ सोचकर,
फिर कैसे उसे कह दूँ के आँगन खुशियों का छोड़ के आजा।।
बड़े ख्वाब देखे होंगे माँ बाप ने उसको लेकर,
कैसे कहूँ चाँद तारों की बातों के पीछे ,सपना उनका तोड़ के आजा।।
बड़े नाज़ों से पाला है तुझे ,तेरी खुशियां खरीदी है अपनी ख़ुशी बेचकर,
कैसे कहूँ अपनी खुशी के ख़ातिर "चौहान" कब्र उनकी खोद कर आजा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
Waoo amazing ..👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThanks bro 🤩🤩🤩
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