Tuesday, 25 June 2019

"माँ -रब का नाम" (MAA - RAB KA NAAM)


"चौहान" की इतनी औक़ात नही, तेरा कर्ज़ चुका पाऊँ मैं
एक बार फिर आ ना माँ, फिर तेरे सीने लग जाऊँ मैं।।

बरसो से सोया नही था ,तेरे आँचल में सिर क्या रखा ,
सुकून से सो गया,
अब तक बस सुनते ही आया था के भगवान होते है,
तुझे देखा तो यकीन हो गया।।

सुना था के वो हाकिमों से भी बढ़कर होती है,सफा है हाथों में उसके,
उसने प्यार से माथा क्या सहलाया,हर दर्द मानो सुकून हो गया।।

जितनी गुज़री है बस इन ग़मो को अपना बनाकर ही तो गुज़री है ज़िन्दगी,
तूने सहारा क्या दिया मुझे, खुशियों से तोएबा जन्मों का नाता हो गया।।

बड़े नसीब वाले होते है वो जिन्हें ताह उम्र नसीब होता है तेरा प्यार,
आज तूने सीने से लगाया तो जाना क्यों तेरी ममता का खुदा भी तलबदार हो गया।।

क्या पता था कि कभी मेरा लिखा भी चलेगा जमाने मे इस कदर,
बरसो पहले लिखी थी एक नज़्म आज सच होते देखी तो "चौहान" खुद ही रो गया।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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