"कब तक तुझे यूँ किताबों में लिखता रहूँगा,
क्या यही ज़िन्दगी है तेरे नाम पे बिकता रहूँगा।।"
इतना हौंसला मैं कहाँ से लेकर आऊँ,
तू बता ना तेरी यादों से दूर कैसे जाऊँ,
बार बार उस मिट्टी तक आ जाता हूँ,
जी करता है इसी मिट्टी में मैं भी मिल जाऊँ ।।
अब सब कहाँ पहले जैसा है,
जो दिख रहा है कहाँ सब वैसा है,
दिखा ना कोई तो रौशनी मुझे भी,
जिसमे आज मैं भी रौशन हो जाऊँ।।
रिश्ते क्या होते है अब समझ आये है,
रंग ज़िन्दगी ने भी खूब दिखलाये है,
कोई तो मलहम बता ज़ख़्मो का मेरे,
साथ इन ग़मो का मैं कब तक निभाऊं।।
क्यों कभी तुझसे कुछ गिला ना हुआ,
शिकायते ना हुई कोई शिकवा ना हुआ,
दिखा ना तेरी नई दुनिया कैसी नज़र आती है,
बुला ना मुझे भी मैं भी तेरे साथ वहाँ नई दुनिया बसाऊँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Top class lines Bhai 🌹❤️
ReplyDeleteThanks bro 😍😍
Delete👌👌👌😀
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteSuperb likha hai bro
ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍
DeleteWaah Shubham Sir, kya baat❤
ReplyDeleteThanks sir 😘😍😍
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