"दो दिन मोमबत्ती जला धरना देकर भूल गए सब, किसे पता,
आज भी वो माँ उसकी तस्वीर को सीने से लगा कर रोती है।।"
ITS ALL ABOUT 'CHILD RAPE' . I AM NOT TALKING ABOUT RECORDS. DON'T KNOW HOW MUCH TRUE THIS REPORT BUT IF IT IS 1% TRUE THEN ITS REALLY SHAMEFUL, THINK ABOUT IT."
मासूम थी वो बच्ची उसको कहाँ जमाने का होश था,
मैं कैसे मान लूँ यहाँ भी बस कपड़ो का दोष था।।
सड़को पर उतरा देश हाथों में मोमबत्तियां लेकर,
देखा मैंने जमाने में खिलाफत का कितना रोष था।।
दो दिन का हंगामा है साहब फिर भूल जाते है सब,
खुद पर गुज़रे तो समझ आये,दूसरों के दर्द का किसे होश है।।
तमाशा देखते है बस आज के वक़्त में सब खड़े होकर,
हक़ीक़त किसे पता कौन गुनहगार तो कौन निर्दोष है।।
नाबालिग कहकर छोड़ देता है क़ानून बलात्कारियों को,
क्या कहूँ इस दरिंदगी का असली दरिंदा कौन है।।
चिल्ला- चिल्ला कर पूछ रही है रूह उसकी ,
अब क्यों सड़के खाली है,क्यों हर कोई मौन है।।
वो गिध्द की तरह नोंच-नोंच कर खा गए जिस्म उसका,
उस मंदिर के भगवान क्या पत्थर भी अब तलक मौन है।।
ज़मीर मर चुका है लोगो का, सबको अपनी पड़ी है,
"चौहान" अपने गिरेबाँ में झाँक कर देखता कौन है।।
अपने किरदार को थोड़ा तो संभाल के रख "चौहान",
उसे सबकी खबर है मत सोच अकेले में देखता कौन है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
आज भी वो माँ उसकी तस्वीर को सीने से लगा कर रोती है।।"
ITS ALL ABOUT 'CHILD RAPE' . I AM NOT TALKING ABOUT RECORDS. DON'T KNOW HOW MUCH TRUE THIS REPORT BUT IF IT IS 1% TRUE THEN ITS REALLY SHAMEFUL, THINK ABOUT IT."
मासूम थी वो बच्ची उसको कहाँ जमाने का होश था,
मैं कैसे मान लूँ यहाँ भी बस कपड़ो का दोष था।।
सड़को पर उतरा देश हाथों में मोमबत्तियां लेकर,
देखा मैंने जमाने में खिलाफत का कितना रोष था।।
दो दिन का हंगामा है साहब फिर भूल जाते है सब,
खुद पर गुज़रे तो समझ आये,दूसरों के दर्द का किसे होश है।।
तमाशा देखते है बस आज के वक़्त में सब खड़े होकर,
हक़ीक़त किसे पता कौन गुनहगार तो कौन निर्दोष है।।
नाबालिग कहकर छोड़ देता है क़ानून बलात्कारियों को,
क्या कहूँ इस दरिंदगी का असली दरिंदा कौन है।।
चिल्ला- चिल्ला कर पूछ रही है रूह उसकी ,
अब क्यों सड़के खाली है,क्यों हर कोई मौन है।।
वो गिध्द की तरह नोंच-नोंच कर खा गए जिस्म उसका,
उस मंदिर के भगवान क्या पत्थर भी अब तलक मौन है।।
ज़मीर मर चुका है लोगो का, सबको अपनी पड़ी है,
"चौहान" अपने गिरेबाँ में झाँक कर देखता कौन है।।
अपने किरदार को थोड़ा तो संभाल के रख "चौहान",
उसे सबकी खबर है मत सोच अकेले में देखता कौन है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Truly written.....
ReplyDeleteThanku so much 😊
Delete1 no
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteEaxctly right.....👍👍👌👌👌👌
ReplyDeleteThankq 😍😍😍😍
ReplyDeleteBhut hi sundr shbdo me bayan ki ye samaj ki kadvi sacchai.....nice line with dip feelings.....
ReplyDeleteThanks alot mam 😍😍😍
ReplyDeleteBahot khub Bhai❤️
ReplyDeleteThanks alot bro 😊😊
DeleteKya khoob likha h bhai 😊😊
ReplyDeleteThanks alot bro
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