दिल मे नफऱत चहरे पर मुहोब्बत लेकर मिलते है लोग,
हाथों में खंज़र लेकर बड़ी शराफ़त से मिलते है लोग।।
फिर वही हाल पूछने के बहाने ज़ख़्मो को कुरेद जाते है ,
मलहम बता बता कर ज़ख़्मो पर नमक लगते है लोग।।
मतलब के रिश्ते है मतलब तक का ही साथ है जमाने मे,
वक़्त आता है तो अपनी बातों से मुकर जाते है लोग।।
हक़ीक़त तो ये है किसी को परवाह नही किसी के हाल की,
चिराग जलाने के बहाने आशियाना जला जाते है लोग।।
मैं तेरी नज़र में काफ़िर तो फिर काफ़िर ही सही ,
आजकल तो तोहमत खुदा पर भी लगाते है लोग।।
वो है कि दुनिया बनाकर भी खामोश बैठा है ,
ना समझ उसी को रूतबा दिखाते है लोग।।
आज अपनो को अपना कहने से कतराते है "चौहान",
शोहरत देख तो फिर बेगानों को भी अपना बनाते है लोग।।
विश्वास ना कर यूँ हर किसी पर,सब एक छलावा है,
गले मिलने के बहाने खंज़र पीठ पर चलाते है लोग।।
सियासती फंदे में फँसकर दम तोड़ चुकी है इंसानियत,
अब हैवानियत की चिंगारी को आतिश बनाते है लोग।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Ek ek shabd shi h...dil se likhi hui ek bhut hi khubsurat rachna.....
ReplyDeleteThanks alot dear 😊😊
DeleteAwesome.....👌👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThanks 😊😊
DeleteOye hoye kill Dil brother ❤️
ReplyDeleteThanku so much brother 😊😊
Delete