चल माना मंज़िले नही, रास्ते है ,नसीब में,
इतना हौसला दे के उम्रभर इन रास्तों के हो जाऊं।।
चल माना नही है खुशियों का उजाला मेरी ख़ातिर,
इतना हौसला दे के ग़मो के अंधेरे में ही खो जाऊँ।।
बस एक उसकी जिंदगी रौशन करके रख खुदा,
फिर चाहे बदले में मैं नज़र-ए-आतिश हो जाऊँ।।
वक़्त कब किसकी राह देखता है "चौहान",
इतना हौसला दे के मैं उम्रभर राह उसकी देख पाऊँ।।
सुना है चट्टानों से टकराकर मुड़ जाती है लहरें वापिस,
चट्टान ही बना दे एक पल को सही उसे छू तो पाऊँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
पहचान खुद-ब-खुद हो जायेगी तेरी मुझसे, कभी मेरे नज़रिए से मुझे पढ़ के तो देख!!
Wednesday, 2 September 2020
"हौंसला" (HAUNSLA)
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