मैं जानता हूँ तुझे आज भी मेरा नही होना,
अश्क़ों से भीगा मेरा ये पहरान नही धोना।।
कोई कमी तो बता जो मुझमें बाकी रह गयी,
क्यों मुझे इस सागर में खुद को है डुबोना।।
दिल अपनी ज़िद्द पर है तू अपनी ज़िद्द पर,
एक मैं हूँ जिसे अब किसी का नही होना।।
मुझसे गर रौशन होती है जिंदगी किसी की तो बेशक,
जला दो "चौहान" को मुझे यूँ बेज़ार नही होना।।
तेरा इंतज़ार ही तो है कुछ लम्हे साल अब उम्रभर ही सही,
अब मौत ही अच्छी है मुझे ज़िंदगी का नही होना।।
मैं अगले जन्म फिर आऊँगा लिखने कहानी इश्क़ की,
इस बार जो हुआ सो हुआ उस बार आखिर में तुम मेरे ही होना।।
फिर छोड़ देगा "चौहान" फ़साने मुहोब्बत के लिखने,
जब मिलो इस बार सीने से लिपट कर मत रोना।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Amazing sir
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