Monday, 22 June 2020

"एक रात की कहानी" (EK RAAT KI KAHANI)


क्यूँ पूछते हो मुझसे तुम मेरा हाल ,
मैं कहाँ तुम्हे सब सच सच बताऊँगा,
मेरा हद से ज़्यादा यकीन भी मत करना,
वक़्त आने पर तुम्हारे काम ना आऊँगा।।

हाँ, घटाए काली है,बादल भी छाए है,
ये मत सोचना के मैं बरस जाऊँगा,
हवाओं सा हूँ मेरा ऐतबार ना करना,
किसे खबर कब कहाँ रुख बदल जाऊँगा।।

हाँ, मुहोब्बत रास नही आती अब मुझे,
किसी को इस दिल की दहलीज तक ना लाऊँगा,
वक़्त की बंदिशो में कैद नही ये सफर मेरा,
जब जहाँ मेरा दिल करेगा मैं ठहर जाऊँगा।।

एक रात कहानी मेरी तुमको बताऊँगा,
फिर आगे उसके कुछ कह ना पाऊँगा,
ज़िक्र होगा बस उसका फिर कलम से मेरी,
लिखूँगा उसे और पूरा करते करते मर जाऊँगा।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

2 comments:

  1. हाँ, मुहोब्बत रास नही आती अब मुझे,
    किसी को इस दिल की दहलीज तक ना लाऊँगा,
    वक़्त की बंदिशो में कैद नही ये सफर मेरा,
    जब जहाँ मेरा दिल करेगा मैं ठहर जाऊँगा। Fabulous lines♥️

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