Friday, 26 June 2020

"तुझसे क़ीमती"(TUJHSE KEEMTI)



कुछ लम्हात की बात थी और वो गुज़रा हुआ वक़्त याद आ गया,
कहीं एक घर और ना तबाह हो जाए, मैं बीच राह से आ गया।।

फिर वहीं बातें फिर वही तकरार होने का डर था इस दिल मे,
कुछ टूट के बिखरता उस से पहले मैं सब दिल मे दबा के आ गया।।

एक खो दिया एक को खोना नही चाहता किसी भी कीमत पर,
एक जज़्बातों की दीवार थी दरमियां मैं आज गिरा के आ गया।।

मंज़िले इतनी भी ज़रूरी नही थी के हमसाया ही ना मिले,
इश्क़ का तूफ़ान था मैं दिल के सहरा में दबा के आ गया।।

वो फिर कोई भी हो "चौहान" तुझसे जरूरी तो नही,
इस मशान में आज मैं खुद को जला के आ गया।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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