Wednesday, 3 June 2020

"ख़ामोश कलाकार" (KHAMOSH KALAAKAR)


पहले गा कर सुनाती थी जो आवाज़ें ,
आज आवाज़ उनकी सुन कौन रहा है।।

ख़ामोश पड़ी है आवाज़ साज़ो की अब,
अब साज़ो की तड़पन सुन कौन रहा है।।

अब वो हाथ तस्वीरों में रंग कैसे भरे ,
अब उस तस्वीर को देख कौन रहा है।।

पैरों की थिरकन भी अब थम ही गयी है,
घुँघरुओं की धड़कन सुन कौन रहा है।।

कलम भी अब लिखना छोड़ गई"चौहान",
अब शायरों का मन पढ़ कौन रहा है।।

अब नाटक भी कितनी हक़ीक़त बताएगा,
असलियत नाटककारों की देख कौन रहा है।।

सियासी बाशिंदे हाल सबका पूछ रहे है मगर,
कलाकारों के हालात आज पूछ कौन रहा है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

5 comments:

  1. आज फिर दिल को सुकून नहीं है
    आज फिर मुस्कुराने का मन नहीं है
    आज फिर ख़ामोश सी है जिंदगी 🤫✍️
    आज फिर उठाई क़लम पर लिखने का मन नहीं है।

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  2. 👌👌👌👌👌👌👌👌♥️♥️♥️

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