Wednesday, 10 June 2020

"दूर" (DOOR)


यकीनन मर रहे है तेरे बिन लम्हा-लम्हा,
तेरी यादों से तो अब दूर ही अच्छे है।।

नींदों से भी कोई वास्ता नही अब हमारा,
तेरे ख़्वाबों से तो अब दूर ही अच्छे है।।

अब सवाल मेरे कोई मायने नही रखते,
तेरे जवाबों से तो अब दूर ही अच्छे है।।

कहीं मुकम्मल है तो फिर कहीं अधूरी,
इन किताबी कहानियों से दूर ही अच्छे है।।

अब जब हम इन रास्तों के ही हो गए है,
इश्क़-ए-मंज़िल से तो अब दूर ही अच्छे है।।

अब कोई वास्ता नही तेरी गलियों से हमारा,
तेरे शहर से तो अब हम दूर ही अच्छे है।।

हम जैसे भी है ठीक है यूँ फिक्र ना करो तुम,
मरहमों से तो अब ये ज़ख्म नासूर अच्छे है।।

कही मशहूर तो कहीं बदनाम यही है "चौहान",
इन शायरों के खेल से तो हम दूर ही अच्छे है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

2 comments:

  1. नींदों से भी कोई वास्ता नही अब हमारा,
    तेरे ख़्वाबों से तो अब दूर ही अच्छे है।। Very nice work bhai♥️

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