Monday, 1 June 2020

"आख़िरी रात" (AAKHIRI RAAT)



सफर की आखिरी रात है कुछ बात हो जाये,
और बात इतनी हो के बस इंतहा हो जाये।।

अब यहाँ से रास्ते अलग है हमारे तुम्हारे,
कुछ ऐसी करामात हो, रास्ते जुदा ना हो पाए।।

मंज़िले अलग है अगर अब हमारी-तुम्हारी ,
हम रास्तों पर रहे और मंज़िले खो जाये।।

अगर सब जान लेना ही अंत है रिश्तों का तो,
चल एक बार फिर से हम अज़नबी हो जाये।।

फिर तुम पूछना मेरे बारे में वो बातें सभी,
और फिर जान-पहचान में ये उम्र पूरी हो जाये।।

मैं फिर पढ़ कर सुनाऊँ तुझे कविताएं मेरी,
और फिर तू मेरे कांधे पर सिर रख कर सो जाएं।।

फिर वादा करले हम एक दूसरे से वो इश्क़ का,
आ एक दूसरे में फिर हम मुलतवी हो जाये।।

मेरी साँसे भी रुक जाए साथ तेरे "चौहान",
जमाना किस्से हमारे हमें पढ़ के सुनाए।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

5 comments:

  1. मैं फिर पढ़ कर सुनाऊँ तुझे कविताएं मेरी,
    और फिर तू मेरे कांधे पर सिर रख कर सो जाएं।। ... Superb lines😋😘😍🌹

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  2. 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌

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