क्या ये उम्र युहीं गुज़र जाएगी,
क्या ये ख्वाइशें यूँही मर जाएंगी,
तुझे याद करते करते,
तेरी राह देखते देखते।।
दिल के पलते उन अरमानों का क्या,
आंखों के सागर में तूफानों का क्या,
क्या ये एक दिन सहरा बन जाएंगी,
तुझे याद करते करते,
तेरी राह देखते देखते।।
उन टूटे रिश्ते नातों का क्या,
उन बिखरे काँच से वादों का क्या,
क्या लाश बन मुझमे दफन हो जाएंगे,
तुझे याद करते करते,
तेरी राह देखते देखते।।
अब लिखना लिखाना भी क्या,
अब सुनना सुनाना भी क्या,
"चौहान" एक रोज़ कलम भी मर जाएगी,
तुझे याद करते करते,
तेरी राह देखते देखते।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice....����
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteNice lines
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteNice 👌👌👌👌
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