Saturday, 14 December 2019

"जैसा है ठीक है" ( JAISA HAI THEEK HAI)


मैं और तू ,चल!!
जैसा है ठीक है।।

मेरे गम तेरी खुशी,
चल!! जैसा है ठीक है।।

तेरे लबो की हँसी,
मेरी आँखों की नमी,
तू अच्छा सही ,
मैं बुरा ही सही,
चल!! जैसा है ठीक है।।

मेरी हार सही,
तेरी जीत सही,
चल!! जैसा है ठीक है।।

मेंरा झूठ तेरा सच,
कुछ घाव और ये वक़्त,
चल!! जैसा है ठीक है।।

मेरी ज़ुबाँ जैसे ख़िलाफ़त,
तेरी बेअदबी जैसे लियाक़त,
चल!! जैसा है ठीक है।।

अब "चौहान" थोड़ा मगरूर है,
मतलबियों से बहुत दूर है,
जहाँ वफ़ा मिली वहाँ सिर झुकाया,
जहाँ दगा हुआ उन्हें माफ किया,
जो करीब है वो कोहिनूर है,
जो दूर है वो अब बस दूर है।।

वक़्त का लिखा सामने सबके आएगा,
क्या खोया क्या पाया वक़्त बताएगा,
उम्रभर के रास्ते है तो क्या हुआ,
मंज़िल कौनसा हमसे दूर है।।

ये वक़्त, ये मौसम,
ये रास्ते , ये मंज़िल,
ये तन्हाई, ये रुसवाई,
चल!! जैसा है ठीक है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


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