क्यों कहानियां अधूरी रह जाती है,
क्या इबादत में फिर कमी रह जाती है,
जिनको भी होती है सच्ची मुहोब्बत "चौहान",
क्यों वो एक तरफा होकर रह जाती है।।
तेरी कायनात में इश्क़ का कोई मुकाम नही है,
क्यों मुहोब्बत का हकीकत में कोई नाम नहीं है,
क्यों जिस्मों तक सिमट कर रह गया इश्क़,
क्यों हवस जिस्मों की मुहोब्बत बनकर रह जाती है।।
मैं नही कहता कि मेरी पाक मुहोब्बत है,
राधा कृष्ण के जैसी इश्क़-ए-इबादत है,
पर इतना जरूर है कि करता मुहोब्बत हूँ,
वो नही जो हर किसी हुस्न पर बदल जाती है।।
कोई इश्क़ का भी अपनी कलम से मुकाम लिख,
सच्ची मुहोब्बत का भी कोई नेक अंजाम लिख,
"चौहान" के लिखने से तो सोच भी नही बदलती लोगों की,
सुना है तेरे लिखने से लोगों की तकदीर बदल जाती है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Thanks bro 😍😍😍
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ReplyDeleteNice lines bro 👌
ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍
DeleteNice
ReplyDeleteSuperb line bro
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