Friday, 13 December 2019

"ज़िम्मेदारी " (ZIMMEDARI)


ज़िंदगी हर मोड़, हर राह पर सिखाती है,
उम्र से पहले भी हालातों से लड़वाती है,
कोई बचपन कोई जवानी भुल के बैठा है,
लोग कहते है शादी के बाद जिम्मेदारियाँ आती है।।

कोई दो वक्त की रोटी की तलाश में मज़बूर है,
कोई घर की खातिर अपने ही घर से दूर है,
अपने ही घर मे उन्हें मेहमानों सा बनाती है,
लोग कहते है शादी के बाद जिम्मेदारियाँ आती है।।

माना घर के लोग चार से पांच हो जाते है,
इन्होने अपना घर बसा लिया ये अल्फाज़ कहे जाते है,
हाँ बस राह की कठिनाइयाँ बढ़ जाती है,
लोग कहते है शादी के बाद जिम्मेदारियाँ आती है।।

किसी को माँ बाप के इलाज की फिक्र थी,
किसी को रात के खाने की फिक्र थी,
किसी की आँखें घर जाने को तरस जाती है,
लोग कहते है शादी के बाद जिम्मेदारियाँ आती है।।

कोई उम्र ना थी ये उसके काम करने की,
यूँ हँसती खेलती ज़िंदगी हराम करने की,
"चौहान" की कलम से फिर बगावत नज़र आती है,
लोग कहते है शादी के बाद जिम्मेदारियाँ आती है।।

उसका भी बचपन हँसी खेल में गुज़रता,
यूँ मज़बूरियों के बोझ तले ना दबता,
सोच देख जमाने की फिर कलम उठानी पड़ जाती है,
लोग कहते है शादी के बाद जिम्मेदारियाँ आती है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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