जिस रोज़ खुद को लिखूँगा तुझपर कहर बरसेगा,
सुन कहानी मेरी ये आसमाँ इस ज़मी को तरसेगा।।
तब आना खुदा तू भी सुनने किस्से- कहानी मेरी,
तेरे इन बादलों से पानी नही फिर सैलाब बरसेगा।।
तूने तो बस देखा है मैं तो गुज़रा हूँ उस हाल से,
जब तुझ पर गुज़रेगी तो मौत पाने को तरसेगा।।
आज तेरे क़रीब हूँ तो तुझे कदर नही मेरी मेरे जज़्बात की,
जब चला जाऊँगा दूर तुझसे तो एक झलक को तरसेगा।।
क्या हुआ आज महज़ मजाक लगते है ख़्वाबो के घर मेरे,
जब बनेगें आशियाँ ख्वाबों के तो अंदर आने को तरसेगा।।
यकीन मान पढ़कर रोएगा बहुत किस्से मेरी किताब के,
यकीन मान मेरा फिर अपने अतित में जाने को तरसेगा।।
कुछ बताऊँगा कुछ जला कर राख कर लूंगा संग अपने,
फिर अंज़ाम जानने को "चौहान" ये पूरा जहान तरसेगा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

🔥🔥🔥🔥👌
ReplyDeleteThanks 😍😍😍😘😘
Deleteतूने तो बस देखा है मैं तो गुज़रा हूँ उस हाल से,
ReplyDeleteजब तुझ पर गुज़रेगी तो मौत पाने को तरसेगा। What a line Bhai superb keep it up 😘❤️ brother
Thanks bro 😘😘😘😍👍😍
DeleteAmazing lines 👌👌👌👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThanks dear 😍😍😍🤗🤗
Delete👌👌👌👌😟
ReplyDeleteThanks bro 🤗🤗😘😍😍😘
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