जाने वाले फिर कहाँ आते है,
बस एक याद बन जाते है,
बड़ा अजीब खेल है खुदा का,
एक ख़्वाब पूरा तो बाकी टूट जाते है,
मैं मौसम की तरह तो नही बदला,
पर हक़ीक़त है ये भी,
पतझड़ में कहाँ पत्ते नए आते है,
सूखे दरख़्त पर एक पत्ता हरा सा मैं,
कहाँ तक अपने वजूद को बचा पाते है,
सब आये इस ज़िंदगी मे एक तेरे सिवा,
गलत कहते है कि इश्क़ करने वाले मिल जाते है,
आज मेरी खामोशियाँ चुभ रही है सबको,
कहते है तेरी बातों के पल बहुत याद आते है,
उसने हर कहीं देखा मुझे एक खुद को छोड़कर,
शायद अनजान था के प्यार करने वाले ,
दिल मे बस जाते है,
कोई जाओ उसे बतला दो इश्क़-ए-कहानी का अंज़ाम,
जो इश्क़ में हार जाते है,
वो आँखो में उदासी, लबों पे ख़ामोशी,
और चहरे पर मुस्कान लिए,
चलती साँसों के साथ "चौहान" खुद को दफ़न कर जाते है।।
रहते है सबके दरमियाँ पर देख ज़रा,
ऐसे शक्श कहाँ लौट कर आते है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Thanks 😍😍
ReplyDeleteWow
ReplyDeleteAmazing lines ya best h
ReplyDeleteThanks Manpreet 😍😍😍
DeleteGreat bro😘
ReplyDeleteThanks 😍😍
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