Tuesday, 29 October 2019

"मिले नही" (MILE NHI)


इस बार हम मिले नही तो क्या हुआ,
ये फूल दिलों के खिले नही तो क्या हुआ,
सदियों से यही चलता आ रहा है ,
दो प्यार के राही बिछड़ गए तो क्या हुआ,
इश्क़ जिस्मों का नही रूह का था,
किसने कहा के दूरियों से मिट गया,
माना दूर है आसमाँ ज़मी से,
पर दूरियों में मिलन नज़र आता ज़रूर है,
बिखर जाता है वो बनकर बूंद ,
ज़मी की आगोश में वो आता ज़रूर है,
किसने कहा के हवाओं कि गिरफ्त में दीया बुझ गया,
फड़फड़ाई ज़रूर थी लौ हवाओं की होकर,
मौका देखकर कोई परवाना शमा का होकर जल गया,
अब किसी के मिलने में दीया बुझ भी गया तो क्या हुआ,
मैं हर रोज चाँद में तुझे देखूँगा, छत पर अकेले बैठकर,
तुम भी मेरा अक्ष ढूंढ़ना उस चाँद में कही खोकर,
एक जन्म का नही हर जन्म का नाता है
एक किस्सा नही जो चंद पन्नो में सिमट गया,
कभी दिल छोटा मत करना के हम मिले नही,
फक्र करना के अपने लिए फ़ैसलों पर,
अपनो की खुशी की खातिर,
इश्क़ रास्तों का होकर ही रह गया तो क्या हुआ,
मैं हर पल तेरा ज़िक्र करूँगा ,
"मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ" में,
तुम भी हर लफ्ज़ को अपना समझ के पढ़ना,
सुना है सब खत्म हो जाता है पूरा होकर,
अधूरा होकर भी आज इश्क़ हमारा ज़िंदा है,
कहाँ किसी को सपनो का मुक्कमल जहाँ मिलता है,
इबादत सब करते है "चौहान",
कहाँ सबको खुदा मिलता है,
वक़्त की फेर से कहाँ भगवान भी बच पाया है,
इश्क़ राधा से था, दीवानी मीरा थी जिसकी,
किस्मतों ने रुक्मणी का बनाया है,
इश्क़ हक़ीक़त था तो आज भी नज़र आता है,
जिस्म था रुक्मणी के पास पर,
हर कोई तो राधा मोहन ही बुलाता है,
लैला मजनूं, हीर रांझा, सिरी फरहाद,
कहाँ कौन कब मिल पाया है,
ये भी हकीकत मान "चौहान",
इश्क़ ने खुद को हर युग मे दोहराया है,
छोड़ ताने बाने रिश्ते नाते दुनिया के,
आ सबसे परे एक देश चल,
जो इश्क़ ने बसाया है,
इश्क़ रूहानी ज़िंदा रख,
जिस्मो का तू मेल छोड़,
चल ऐसे परदेश चल,
जिस चौखट पर आकर,
रूह से मेल रूह का हो पाया है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

19 comments:

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  2. Thumare hr blog m gehraai chhupi hoti h jo use or bhi interesting bna deti hai..

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  3. Kafi achha likhate ho ap apki ye kavita dil ko chhu gyi its very hurt toching poem

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