Tuesday, 22 October 2019

"मिले क्यूँ??" (MILE KYUN??)


अब जो वापिस उन गलियों में जाऊँ,
ऐसा मेरा उनमे बचा क्या है,
सब कुछ तो खत्म हो गया था बरसों पहले,
तेरे मेरे दरमियाँ अब रहा क्या है,
वो जिस मिट्टी को बार बार टटोल रहे हो तुम,
सिर्फ धूल है तेरा उसमे बचा क्या है,
तेरे जो फैसले थे उनसे ही खुश रह अब,
अब क्या खोया क्या पाया,
इन सब मे वक़्त जाया करने पर मिला क्या है,
आज कब्र पर आकर वो रो भी देगा तो क्या,
अब ऐसे मिलने को रहा है क्या है,
किताबों में लिखे "चौहान" फ़साने मुहोब्बत के अपनी,
ऐसा हसीन पल कोई हुआ ही कहाँ है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

2 comments:

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...