Thursday, 24 October 2019

"क्यों हो रहा है" (KYON HO RHA HAI)


"चौहान" ये क्या और क्यों हो रहा है,
सब कुछ क्यों जुदा जुदा सा हो रहा है,
क्यों दिल टूट रहे है तेरे अपनो के तेरे हाथों,
क्यों तू आज सबसे अलग हो रहा है,
"चौहान" ये क्या और क्यों हो रहा है,
मत बोल , खामोश रह, तेरी ज़ुबाँ अच्छी नही है,
तोड़ दे कलम, जला दे वर्क़े सारे,
जिसे तू लिख के बताए सबको,
ये ज़िन्दगी उतनी अच्छी भी नही है,
क्यों तबाह कर रखा है अपनी खुशियो का शहर,
क्यों इस तन्हाई में तू ख़ाक हो रहा है,
सो जा चैन से ,छोड़ सब जाने दे,
गुज़रा वक़्त बन जा, लोगों को समझ तो आने दे,
यूँ शमशान करके अपने दिल की बस्ती,
क्यों इन ख़्वाईशो,ख़्वाबों के लिए रो रहा है,
सब भर्म ही तो था आख़िर,
सब हक़ीक़त ही तो है जो हो रहा है,
"चौहान" ये क्या और क्यों हो रहा है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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