हार ही तो गया हूँ ज़िंदगी मे ,
वक़्त से हालातों से,
जल ही तो रहा हूँ,
इन तन्हा ग़मो की बरसातों में,
टूटा भी तो इस कदर ,
के जुड़ने का सवाल ही नही था,
करवट ऐसी ली वक़्त ने,
जिसका ख्याल ही नही था,
कुछ बाकी रह गया था पीछे,
आज वो सब उजाड़ के आया हूँ,
कुछ कर्ज़ था किसी का मुझपर,
आज वो कर्ज़ भी उतार के आया हूँ,
जीत जाता तो शायद मेरे अपने हार जाते,
खुश हूँ "चौहान" के अपनो से हार के आया हूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Aaye hye ek no Bhai👌 apno s har KR aaya hu
ReplyDeleteThanks 😍😍😍😍😍
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