Monday, 7 October 2019

"रावण-2" (RAVANN-2)


वो भक्त था शिव का भक्त सच्चा था,
हाँ हकीकत में रावण बहुत अच्छा था।।

अपना अंज़ाम ना सोचा बहन के सम्मान के आगे,
हाँ हक़ीक़त में वो भाई भी सच्चा था।।

मौत सामने देख भी डगमगाये ना कदम जिसके,
हाँ हक़ीक़त में वो अपने इरादों का पक्का था।।

छुआ नही पराई स्त्री को उसकी मर्जी के बिना,
मर्यादा पुरुषोत्तम तो नही पर अपनी मर्यादा का था।।

माना अपनी असीम शक्तियों से थोड़ा अभिमानी भी था,
तपस्वी, तेजस्वी, तांडव संगीतबद्ध करने वाला ज्ञानी था।।

ना जाने कितनी ही बार वक़्त ने उसे आज़माया था,
शिव भक्ति में शिव चरणों मे अपना शीश भी चढ़ाया था।।

एक बात है "चौहान" जो हर साल मेरे जहन में आ जाती है,
क्या वो भी राम था जिसने दशहरे में हर साल रावण जलाने का रिवाज चलाया था।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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