Monday, 16 July 2018

"अलविदा ज़िन्दगी" (ALVIDA ZINDGI)


नफरतें मैं निभा रहा हुँ तुझसे , नफरतें तू भी निभा,
ले कह दिया अलविदा ज़िन्दगी अब तो दूर चली जा।।

किस हद्द तक गुज़र गया हूँ मैं मंज़िल की तलाश में,
अब रास्तों से मुहोब्बत है मुझे मंज़िल ना दिखा।।

सलूक मेरे जैसा ही कर मेरे साथ भी 'गर वफ़ाएँ है,
यूँ बार-बार ज़िन्दगी जीने का मुझे सलीका ना सीखा।।

बना दे राख या कर दे दफ़न मेरे सपनों की तरहा ही,
खाक कर दे मुझे सौ दफ़ा पर यूँ बार-बार मिट्टी में ना मिला।।

कल भी था "चौहान", कायम आज भी अपने इरादे पर है ,
माना हार गया हूँ तुझसे अब यूँ मुझपर रहमतें ना दिखा।।


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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