दूर कहीं शोरोगुल में सहमी सी खामोशी है मेरी,
मेरी उन्ही खामोशियों का शोर है इश्क़ तेरा मेरा।।
जो कभी टुट ही नही पाई हम दोनों के दरमियाँ,
सच्चे रिश्ते की ये कच्ची डोर है इश्क़ तेरा मेरा।।
वो वक़्त जो कहीं थम सा गया था मेरे खातिर,
उस वक़्त में उन्ही हालातों का जोर है इश्क़ तेरा मेरा।।
तेरे बिना यहाँ मैं अधूरा और मेरे बिना वहाँ तुम,
संगीत में सुर और ताल सा बंधन है इश्क़ तेरा मेरा।।
कहाँ समझ आएगा "चौहान" ज़माने को आसानी से ,
ताल रूपक का सम होता जा रहा है इश्क़ तेरा मेरा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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