दूर ना जाओ हमसे जिया नही जाएगा,
ज़ख़्म ये जुदाई वाला सिया नही जाएगा,
क्यों आंखें नम है मेरी फिर पूछेंगे सब,
पर हाल-ए-दिल बयाँ अपना किया नही जाएगा,
जी लोगे तुम तो मेरे बेगैर पहले भी जीते थे,
पर हमसे तो एक पल भी अब जिया नही जाएगा,
माँगा था साथ कुछ पल का पर वो भी गवारा नहीं,
कैसे कहूँ बेबसी का ये जहर पिया नही जाएगा,
देखता हूँ अक्ष तेरा हर एक चहरे में ,
ख़्वाब तेरा ही रहता है हर नींद के पहरे में ,
हर एक साँस माँगती है तुझे,
अब खुदा खुद तू ही आके बता दे उसे ,
"चौहान" से उसके बिना जिया भी नही जाएगा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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