एक कहानी,एक शुरुआत
फिर मेरी कलम, फिर सब बर्बाद।।
इश्क़ के पिंजरे में थे कैद हम तुम,
अब तुम भी आज़ाद, हम भी आज़ाद।।
ये जो तुमने हमने लिखा एक दूसरे के लिए,
सब युही जाया हो जाएगा आज के बाद।।
मैं मिलने तुमसे आऊँगा एक रोज़ फिर,
इस दुनिया से परे फिर एक वक्त के बाद।।
हर नज़्म हर राग से वाकिफ़ है यूँ तो हम,
अब कहाँ निकल पाएगी बंद पड़े साज़ो से आवाज़।।
किसी के हाथों में था मुक्कदस मुक्कदर मेरा,
किसे खबर थी छूट जाएँगे यूँ हाथो से हाथ।।
कुछ ऐसा अंज़ाम हुआ हस्ती का मेरी "चौहान",
मेरे अपने भी ना चल पाए दो कदम मेरे जनाज़े के साथ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
पहचान खुद-ब-खुद हो जायेगी तेरी मुझसे, कभी मेरे नज़रिए से मुझे पढ़ के तो देख!!
Tuesday, 15 December 2020
"एक कहानी" (EK KAHANI)
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