किस दुनिया में जा रहने लगा है तू,
कोई तेरा अता-पता तो बता,
आकर तुझे जहाँ मिल सकूँ, देख सकूँ,
वो जगह वो रास्ता तो बता,
कैसे सुन पायेगा तू सदा मेरे दिल की,
किस लहज़े से बुलाऊँ वो लहज़ा ही बता,
सारा नीर बहा कर भी एक कतरा संभाल रखा है मैंने,
आजा वापिस इस कतरे को सैलाब ना बना,
देख हर किसी को तो ज़रूरत है आज तेरी,
आलसी ना बन आकर अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा,
दोस्त है तो फिर इस दोस्ती का लिहाज़ भी रख,
खुद मिट्टी होकर "चौहान" पत्थर हमें ना बना,
ढूंढ कर खुश है तू अपनी ये नई मंज़िल तो सुन,
रास्ते बदल अपने उम्र भर का मुसाफ़िर मुझे ना बना।।
वो बंद कमरे में तेरी यादों में खुद को मिटा दूँ,
देख मुझे इतना बुज़दिल, कायर ना बना।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Guzra pal guzra lamha or vo guzri yaade....
ReplyDeleteMita hi deni padti hai vakt bevakt mere dost...agar chhod diya un zarro ko dil k gahraiyo me tumne...to duba dengi ye tumhe apne saath jhaa tum apne aaj ko dhundhte reh jaoge....
Hmmm 👍👍👍
DeleteFabulous lines😍
ReplyDeleteThanks bro 😍😍
DeleteSuperb lines
ReplyDeleteThanks bro 😍😍
Delete