Friday, 26 July 2019

"मदारी नही" (MADAARI NHI)



मैं कलाकार हूँ पर किसी, रंगमंच का मदारी नही,
लिखूँगा जज़्बात हज़ार, किसी की तरफदारी नही।।

वो भूखे अनाथ की तस्वीरों को देख खुश होते रहे,
चित्रकार हालात दिखा रहा था तुम्हे चित्रकारी नही।।

तेरा है तो क्या ख्वाईशें उसकी है खुले आसमान में उड़ना,
परिंद जात है पसंद उन्हें भी पिंजरों में गिरफ़्तारी नही।।

प्यार और विश्वास दोनों लाज़मी है किसी रिश्ते के लिए,
परखी इंसानों की जाती है जानवरों की वफ़ादारी नही।।

झुक जाते होंगे माना मज़बूरी हालातो के आगे लोग,
पैसों से ईमान खरीद सकते हो पर ईमानदारी नही।।

कलम असूलों की है मेरी रुक जाएगी पर झुकेगी नही,
आजकल हालात लिखता है "चौहान" इश्कदारी नही।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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