अब उस शहर उस गली में वापिस जाना ही क्यों है,
कैसे है हम क्या हाल है हमारा उसे बताना ही क्यों है।।
अच्छा है अगर वो आज शर्मिंदा है अपने किये पर,
जो एक बार परख लिया उसे बार बार आज़माना क्यों है।।
लाख रोका था जिसे जाने से दूर हमने एक वक्त पर,
आज वो लौट भी आये तो भी गले से लगाना क्यों है।।
ज़रूरी तो नही रास्ते का हर पत्थर माथे से लगाया जाए,
पत्थर को पत्थर रहने दो पत्थरों को खुदा बनाना क्यों है।।
जिस चौंखट से खाली हाथ लौट आये हो तुम एक दफा,
कहना फकीरों का उस दहलीज़ पर वापिस जाना क्यों है।।
रिश्ते नाते सब बस एहसास की मिट्टी से बने हुए है,
जहाँ एहसास ही नही उस रिश्ते को फिर बचाना ही क्यों है।।
अब ना उसे तुझे पाने की खुशी ना तुझे उसे खोने का डर,
ऐसे रिश्तों पर फिर ये कीमती वक़्त गवाना ही क्यों है।।
जो तेरा होगा कहीं जाने ही नही देगा दूर खुद से तुझको,
जाते हुए को पीछे से आवाज़ लगा फिर बुलाना ही क्यों है।।
संभाल उसको "चौहान" जो एहमियत रखता हो ज़िंदगी मे,
भरी हुई पुरानी कॉपियों पर नया जिल्द चढ़ाना ही क्यों है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Gajab lines....🙏👌👌👌
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteNyc lines ❤️
ReplyDeleteThanks 😍😍😍😍
DeleteSuperb lines 👌 bro❤️
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