Tuesday, 16 July 2019

"मेरा नाम शायर" (MERA NAAM SHAYAR)


लोग कहते है मुझसे की तेरी कलम बड़ी वफादार है,
तू छुपा ,ये कर देती है बयाँ जो तेरे दिल की पुकार है।।

तू अकेला तो नही इस बाजार में जो लफ्ज़ बेचता है,
शायद मरहम लगता है तभी तेरे लाखों ख़रीददार है।।

तेरी सोच , तेरे ख़्यालात, सब एक तज़ुर्बा सा लगता है,
चाक पर चढ़कर जैसे मिट्टी जैसे लेती कोई आकार है।।

शायद नही पढ़ पाया होगा वो अब तलक तेरे जज़्बात ,
कहाँ हकीकत बयाँ करता आजकल कोई कलाकार है।।

मिट्टी हो मिट्टी में मिल मिट्टी बन जाना है एक दिन,
ज़िंदगी भी दगा करेगी माना आज तेरी राज़दार है।।

शायरों की जात नही"चौहान" , ना उम्र तज़ुर्बेकार है,
फिर ये कैसा कर्म है की तेरा शायरों में नाम शुमार है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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