Monday, 8 July 2019

" लाखों मंज़र” (LAKHOON MANZAR)




लाखों मंज़र देखे इश्क़ के,
अब वो पहले वाली बात कहाँ!!

ना वो मौसम सावन के अब ,
प्यार भरी बरसात कहाँ!!

चले थे जिनको थाम कर ,
अब हाथों में वो हाथ कहाँ!!

बनकर चले थे जो हमसफ़र
अब वो हमारे साथ कहाँ!!

लफ़्ज़ों की खामोशी पढ़ "चौहान",
तेरी कलम की यहाँ औकात है क्या!!

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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