Sunday, 14 July 2019

"कुछ बात" (KUCH BAAT)


अगर जतानी ही पड़ जाए तो मुहोब्बत क्या है,
अगर कोई भी चुका जाए तो फिर क़ीमत क्या है।।

अगर चंद पैसों में बिक जाए तो फिर ईमान क्या है,
हर किसी को दिख जाए तो फिर भगवान क्या है।।

जो नींद के साथ ही टूट जाये फिर वो ख़्वाब क्या है,
जो चंद पानी की बूंदों से बुझ जाए वो आग क्या है।।

जो किसी के दिल तक ना पहुचे वो आवाज़ क्या है,
जो तन ही ना ढाँक पाए वो फिर लिबाज़ क्या है।।

जो ठोकर खाकर भी ना समझे वो सीख क्या है,
जो हर दर से मिल जाये फिर वो भीख क्या है।।

जो तुझ तक सिमट कर रह गया वो ज्ञान क्या है,
जो वक़्त वक़्त पर बदल जाए वो ज़ुबान क्या है।।

जो हालातों के आगे बदल जाए वो असूल क्या है,
जो दर्द में ही ना मिल पाए तो फिर सुकून क्या है।।

हर कोई निभा जाए तो फिर ज़िम्मेदारी क्या है,
इंतज़ार ही ना करना पड़े तो बेकरारी क्या है।।

जिसे देख कुछ याद ना आये वो निशानी क्या है,
जिसे हर कोई समझ जाएं तो कहानी क्या है।।

कोई पहचान गया "चौहान" तेरे दर्द को समेटे अल्फ़ाज़ को,
कोई कह गया कुछ गिर गया तुम्हारी आँखों मे पानी सा है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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