तेरी मेरी यारी बहुत खास है,
तू मेरे कल में भी मौजूद था,
तू आज भी मेरे पास है ।।
सुना है कभी मरती नही है ,
मुझे तेरी उस रूह की तलाश है,
क्या हुआ गर एक लिबास छोड़ गया तु,
पहरान बदल के आजा देख,
कितनी ज़िंदगियाँ तुझबिन उदास है,
दूर होता जा रहा हूँ आज कल सब से,
नींदों से भी अब नाता नही कुछ खास है,
नही रखा जाता अब चहरे पर नक़ाब हंसी का,
दिल मे दफ़न कितनी मेरे अरमानों की लाश है,
अतीत में ही कहीं रुक के बैठ गया हूँ मैं,
कलम है कि लिखने को राजी नही "चौहान",
पन्ने काले पड़ रहे है, खाली ज़िन्दगी की किताब है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice 👌👌👌
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