Monday, 8 July 2019

"आ जाना" ( AA JAANA)


कभी किसी मोड़ पर तुम,
अनजाने से ही मिल जाना।।

इस दिल की बंज़र बस्ती में,
तुम फूल बनकर खिल जाना।।

एक वादा किया था तुमने ,
वो वादा निभाने आ जाना।।

चल माना दूरी ज़रूरी है पर,
शाम ढलने से पहले आ जाना।।

बड़ी तपिश है आज दिल में,
तू घटा बनकर छा जाना।।

मैं हवाओं से तेरा पता पूछुंगा,
तू बारिशों के बहाने आ जाना।।

मेरे इंतज़ार की कोई हद नही,
तू मेरी कब्र पर ही आ जाना।।

नही लिखना अब तुझे किताबों में,
तू खामोशी बनकर छा जाना।।

कैसे तोड़े जाते है ये रिश्ते,
"चौहान" को भी सीखला जा ना।।

सब कहते है तू तारों का होके रह गया,
टूट कर आसमाँ से फिर धरती पे आ जाना।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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